एक शराबी की विधवा.
एक शराबी की विधवा.
वह कल भी रोती थी,
आज भी रोती है,
पता नही वह कबतक,
ताऊम्र रोएगी.
वह कल भी रोती थी.......
........
क्या कसूर है बेचारी का?
या क्या कसूर था बेचारी का?
कयों वह कल भी रोती थी,
आज भी रोती है,
यह सिलसिला थम नहीं रहा है,
और वह रोती ही रहेगी.
अब नही लगते है नित,
दो चार तमाचे,
न ही वह कसता है फब्तियां.
केवल उनकी यादों के सहारे,
गिरती है आंसू की झरियां.
वह कुछ भी था आबारा था,
सुहाग का रखवाला था
आज भी रोती है,
पता नही वह कबतक,
ताऊम्र रोएगी.
वह कल भी रोती थी.......
........
क्या कसूर है बेचारी का?
या क्या कसूर था बेचारी का?
कयों वह कल भी रोती थी,
आज भी रोती है,
यह सिलसिला थम नहीं रहा है,
और वह रोती ही रहेगी.
अब नही लगते है नित,
दो चार तमाचे,
न ही वह कसता है फब्तियां.
केवल उनकी यादों के सहारे,
गिरती है आंसू की झरियां.
वह कुछ भी था आबारा था,
सुहाग का रखवाला था
बिल्कुल बेगाना लगता है.
पर क्या करे..
वह कल भी तन्हाई में जीती थी,
आज भी जीती है,
और जीती ही रहेगी.
क्या नसीब लेकर आई है,
कोसती है..कहती है..
शादी क्यों रचाई है.
खुदा को क्या मुझसे गिला शिकवा है,
मेरे लिए एक नई उपमा है
लोग तो अब कहते हैं........
देखो वह तो एक शराबी की विधवा है.
प वेचारी क्या करे....
वह कल भी रोती थी,
आज भी रोती है,
पता नही वह कबतक,
ताऊम्र रोएगी.
नवेन्दु नवीन



बहुत सुंदर नवेंदु जी मार्मिक
ReplyDeleteधन्यवाद मैम
Deleteसादर प्रणाम।