पशुपालन को बढ़ावा
भारत एक कृषि प्रधान देश है, साथ ही यहाँ की अधिकतम आबादी कृषि कार्य में ही संलग्न है;फिर भी ये लोग अपनी ख़राब आर्थिक स्थिति के कारण खुश नहीं है।इसका सबसे बड़ा कारण है कि कृषि एवं पशुपालन के नाम पर केवल क़ानून बनाना एवं कागज़ी खानापूर्ति करना और किसानों की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान न देना।
कृषि एवं पशुपालन अर्थ व्यवस्था का अहम हिस्सा है साथ ही दोनों के बीच अन्योनाश्रय समबन्ध भी है। यदि इस क्षेत्र में सही रूप से काम किया जाए तो यह देश को अकेला विकसित बना सकता है। गौरतलब हो कि कनाडा और अर्जेंटाइना दो ऐसे देश हैं जहाँ की अर्थव्यवस्था ज्यादातर कृषि पर आधारित है और वह विकसित है। फिर हमारा भारत क्यों नहीं ऐसा हो सकता है, जिसके पास उससे ज्यादा उपजाऊ भूमि है।
पशुपालन को बढ़ावा देकर देश में अधिक मात्रा में दुग्ध उत्पादन के अलावे जैव खाद के उत्पादन में भी निर्भर बना जा सकता है। साथ ही कई रोगों की दवा भी इसके मल-मूत्र से तैयार किए जाते हैं।
आज खेतों में केवल जैव खादों का ही उपयोग किया जाता तो लोगों को स्वस्थ्य भोजन भी प्राप्त होता साथ ही जमीन में नमी बनाए रखने की क्षमता भी बढ़ती।
एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से ही पृथ्वी के जल स्तर नीचे जाने के साथ-साथ खेतों में नमी बनाए रखने की क्षमता भी कम गई है।
अतः मुझे यहाँ की सरकार से निवेदन है कि विकास के नाम पर देश का पैसा इधर-उधर बर्बाद करने से अच्छा है कि वे उस रकम रकम को कृषि एवं पशुपालन पर ही खर्च करे।क्योंकि देश तभी खुशहाल होगा जब यहाँ के किसान खुश होंगे।
नवेन्दु नवीन


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